मशरूम की खेती कम ज़मीन में ज़्यादा उत्पादन देती है — बटन मशरूम नियंत्रित तापमान वाले कमरों में साल भर उगाया जा सकता है, जबकि ऑयस्टर और मिल्की मशरूम कम लागत में शुरू हो जाते हैं। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में ग्रोइंग रूम/शेड, कम्पोस्ट, स्पॉन (बीज), AC या कूलिंग, रैक, पैकिंग और बिक्री व्यवस्था का हिसाब होता है। एक बैच 2–3 महीने का होता है, इसलिए साल में बैचों की संख्या और प्रति किलो भाव से बिक्री का अनुमान बनता है।
सामान्य इकाई: ₹6,50,000 · लागत सीमा ₹2–20 Lakh
| खर्च का मद | राशि | हिस्सा |
|---|---|---|
| शेड, सिविल कार्य व भूमि विकास | ₹2,20,000 | 34% |
| उपकरण (फीडर, पंप, कूलिंग आदि) | ₹90,000 | 14% |
| पशुधन / बीज / प्रारंभिक स्टॉक | ₹1,45,000 | 22% |
| प्री-ऑपरेटिव व बीमा | ₹25,000 | 4% |
| आकस्मिक व्यय | ₹25,000 | 4% |
| कार्यशील पूंजी (चारा, मज़दूरी, बिजली) | ₹1,45,000 | 22% |
| कुल परियोजना लागत | ₹6,50,000 | 100% |
ये आंकड़े एक सामान्य इकाई के अनुमान हैं। आपकी रिपोर्ट आपके कोटेशन, जगह और क्षमता के आधार पर सटीक हिसाब बनाती है।
मशरूम उत्पादन, स्पॉन और कम्पोस्ट यूनिट पर क्रेडिट-लिंक्ड बैक-एंडेड सब्सिडी (सामान्यतः लागत का लगभग 40%) — राज्य बागवानी विभाग से पुष्टि करें।
नई इकाई पर 15–35% मार्जिन मनी सब्सिडी।
मशरूम प्रोसेसिंग/पैकिंग (सूखा मशरूम, अचार आदि) पर 35% सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख।
योजनाओं की दरें और शर्तें समय-समय पर बदलती हैं — आवेदन से पहले बैंक या संबंधित विभाग से ताज़ा दिशानिर्देश ज़रूर देखें।
MIDH के तहत मशरूम यूनिट पर लगभग 40% क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी है, PMEGP में 15–35% और प्रोसेसिंग यूनिट पर PMFME में 35% (अधिकतम ₹10 लाख)। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अपनी योजनाएं भी हैं — आवेदन से पहले राज्य बागवानी विभाग से ताज़ा दर देखें।
छोटी ऑयस्टर यूनिट ₹2–5 लाख में और नियंत्रित तापमान वाली बटन मशरूम यूनिट ₹15–20 लाख तक में लगती है।
भाव और उत्पादन पर निर्भर करता है; आमतौर पर शुद्ध मुनाफ़ा बिक्री का 15–25% रहता है।