बत्तख पालन खासकर पूर्वी व दक्षिणी भारत (बंगाल, असम, ओडिशा, केरल, आंध्र) में लोकप्रिय है क्योंकि बत्तखें तालाब और धान के खेतों में अपना काफ़ी चारा खुद ढूंढ लेती हैं। खाकी कैंपबेल जैसी नस्ल साल में 250–300 अंडे देती है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में बत्तखों की संख्या, रात का शेड, पानी की व्यवस्था, चारा, टीकाकरण, अंडा/मांस बिक्री दर और मृत्यु दर का हिसाब दिखाना होता है। मुर्गी की तुलना में बत्तख कम बीमार पड़ती है, जो बैंक के जोखिम-आकलन में मदद करता है।
सामान्य इकाई: ₹6,50,000 · लागत सीमा ₹2–20 Lakh
| खर्च का मद | राशि | हिस्सा |
|---|---|---|
| शेड, सिविल कार्य व भूमि विकास | ₹2,20,000 | 34% |
| उपकरण (फीडर, पंप, कूलिंग आदि) | ₹90,000 | 14% |
| पशुधन / बीज / प्रारंभिक स्टॉक | ₹1,45,000 | 22% |
| प्री-ऑपरेटिव व बीमा | ₹25,000 | 4% |
| आकस्मिक व्यय | ₹25,000 | 4% |
| कार्यशील पूंजी (चारा, मज़दूरी, बिजली) | ₹1,45,000 | 22% |
| कुल परियोजना लागत | ₹6,50,000 | 100% |
ये आंकड़े एक सामान्य इकाई के अनुमान हैं। आपकी रिपोर्ट आपके कोटेशन, जगह और क्षमता के आधार पर सटीक हिसाब बनाती है।
नई इकाई पर 15–35% मार्जिन मनी सब्सिडी।
₹10 लाख तक (तरुण प्लस में ₹20 लाख तक) बिना गारंटी लोन।
चारे व दवाइयों के लिए कार्यशील पूंजी; कई राज्यों में बत्तख इकाई पर अलग सब्सिडी — राज्य पशुपालन विभाग से पुष्टि करें।
योजनाओं की दरें और शर्तें समय-समय पर बदलती हैं — आवेदन से पहले बैंक या संबंधित विभाग से ताज़ा दिशानिर्देश ज़रूर देखें।
1,000 बत्तखों की यूनिट में शेड, बत्तख के बच्चे, चारा, दवा और पहले साल की कार्यशील पूंजी मिलाकर आमतौर पर ₹3–6 लाख लगते हैं, तालाब पहले से हो तो कम।
अंडा-उत्पादन वाली यूनिट में शुद्ध मुनाफ़ा आमतौर पर बिक्री का 15–25% रहता है; सबसे ज़्यादा असर चारे की लागत और अंडे के स्थानीय भाव का होता है।
बैंक में प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ लोन आवेदन करें; PMEGP के लिए KVIC के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन होता है और राज्य योजनाओं के लिए ज़िला पशुपालन कार्यालय में।